Who We Are

Rashtriya NGO Mahasangh, founded in 2019, is India’s largest federation of voluntary, regional, religious, and advocacy NGOs, dedicated to uniting and empowering grassroots organizations for social change. As a national platform, we bring together thousands of NGOs to foster collaboration, innovation, and advocacy in areas such as education, healthcare, women’s empowerment, environmental conservation, and sustainable development. Guided by our Central Executive Committee and province-level committees, we provide dynamic resources, networking opportunities, and representation to strengthen civil society. Our mission is to amplify the voices of communities, promote ethical governance, and drive impactful development across India.

Introduction

Rashtriya NGO Mahasangh, founded in 2019, is India’s largest federation of voluntary, regional, religious, and advocacy NGOs, dedicated to uniting and empowering grassroots organizations for social change. As a national platform, we bring together thousands of NGOs to foster collaboration, innovation, and advocacy in areas such as education, healthcare, women’s empowerment, environmental conservation, and sustainable development. Our mission is to amplify the voices of communities and drive impactful change across India through a vibrant network of civil society organizations.

Our Mission and Vision

Our mission is to empower NGOs by providing resources, advocacy platforms, and networking opportunities to create a just, inclusive, and sustainable India. We envision a strong civil society where grassroots organizations work together to address societal challenges, influence policy, and promote equitable development. By fostering collaboration and ethical governance, we aim to build a brighter future for all communities.

Our History and Milestones

Since our establishment in 2019, Rashtriya NGO Mahasangh has grown into a dynamic force for change. We have united over 87,000+ NGOs across India, launched impactful initiatives in education, healthcare, and environmental sustainability, and represented civil society in key policy forums. Notable milestones include the creation of 15+ dynamic platforms for organizational development and our integration with the NGO Darpan portal, enhancing transparency and collaboration among member NGOs.

Our Structure and Leadership

Rashtriya NGO Mahasangh is governed by a Central Executive Committee, comprising experienced leaders from diverse sectors, ensuring strategic direction and national coordination. Our province-level committees provide localized support, connecting member NGOs with resources and opportunities tailored to regional needs. This decentralized structure ensures that every member organization, from rural trusts to urban advocacy groups, receives guidance and representation to achieve their goals.

Our Impact

Through our network, we have empowered thousands of NGOs to scale their impact. From facilitating access to funding and training to enabling policy advocacy, we have supported several NGOs who have transformed communities in areas like education, healthcare, and women’s empowerment. Testimonials from our members highlight the power of our platforms: “Rashtriya NGO Mahasangh’s resources helped us secure funding and expand our outreach,” says Madhaw Jan Kalyan Foundation, Haryana.

Our Values and Principles

We are guided by the values of integrity, collaboration, inclusivity, and transparency. Our commitment to ethical governance ensures that every NGO in our network operates with accountability and purpose. We believe in empowering every voice, fostering partnerships, and promoting sustainable solutions that uplift marginalized communities and strengthen India’s civil society.

Join Our Movement

Be a part of India’s largest NGO federation and amplify your organization’s impact. Whether you’re a registered NGO, a voluntary group, or a passionate advocate for change, Rashtriya NGO Mahasangh welcomes you to join our mission. Explore affiliation opportunities, access our resources, and collaborate with like-minded organizations to drive meaningful change. Apply for Membership/Affiliation Now or contact us at rashtriyangomahsangh@gmail.com.

राष्ट्रीय एनजीओ महासंघ की दूरगामी सोच

  • किसी भी सामाजिक संस्था द्वारा संपूर्ण वर्ष में किसी भी दिव्यांग, विकलांग, निराश्रित, बेसहारा, बुजुर्गों अथवा जरूरतमंद महिलाओं को किसी भी प्रकार की भोजन अथवा आवासीय सुविधा अथवा सामाजिक सहायता के लिए किए गए वार्षिक व्यय का न्यूनतम 40% भुगतान संस्था को सासंद निधि से कराया जाना सुनिश्चित किया जाए।
  • किसी भी संस्था द्वारा संचालित किसी भी प्रकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के सफलतम तीन वर्ष पूरा होने की स्थिति में उक्त योजना को सरकार अपने अधिग्रहण में लेकर उसका सुदूर संचालन सुनिश्चित करे । और समाज की जरूरत को पहचानते हुए उक्त योजना को लागू करने वाली संस्था को उसके विगत तीन वर्षों में व्यय की गई कुल राशि का 100% भुगतान योजना रॉयल्टी के रूप में किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
  • संस्थाओं के लिए विशेष रूप से गठित NGO Darpan पोर्टल पर संस्थाओं की विभिन्न संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर की सेवाओं को दुरुस्त किया जाए और उसके नियमित और सुगम संचालन को भी सुनिश्चित किया जाए।
  • संस्थाओं से संबंधित और दर्पण पोर्टल पर लिस्टेड विभिन्न मंत्रालयों और डिपार्टमेंट्स में एनजीओ हेल्प डेस्क की समुचित व्यवस्था की जाए। और Ministry of Corporate Affairs की वेबसाइट पर सभी CSR फंडिंग एजेंसियों/कंपनियों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। संस्थाओं के लिए विशेष रूप से बनाए गए CSR Exchange पोर्टल के माध्यम से ग्रांट आवेदनों और इनके सेंक्शन से संबंधित अहर्ताओं को अनिवार्य रूप से सभी संस्थाओं और फंडिंग एजेंसियों पर लागू किया जाए।
  • नई शिक्षा नीति में आंगनवाड़ी, बालवाड़ियों केंद्रों और प्रौढ़ शिक्षा केंद्रों की स्थापना और संचालन की संपूर्ण जिम्मेदारी सामाजिक संस्थाओं को दी जाए।
  • कॉरपोरेट घरानों द्वारा निजी रूप से एनजीओ का संचालन करते हुए, आपस में ही CSR फंडिंग का आदान प्रदान पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाए।
    क्योंकि यह कॉरपोरेट घराने अपने निजी व्यावसायिक फायदों के लिए आपस में ही CSR फंड्स का बंदरबाट करते रहते हैं। जिससे धरातल पर कार्यरत छोटी सामाजिक संस्थाओं को उनके सामाजिक कार्यों के लिए उपयुक्त आर्थिक आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
  • एक करोड़ से अधिक बजट के सभी प्रकार के प्रोजेक्ट्स पाने वाली संस्थाओं पर उक्त कार्यक्रम/प्रोजेक्ट में क्षेत्रीय छोटी और नई संस्थाओं की भागीदारी को अनिवार्य किया जाए । जिससे कि इन बड़ी NGOs के साथ कार्य करके, सभी नई और छोटी संस्थाओं को भी कार्यानुभव प्राप्त हो।
  • जो संस्थाएं लगातार 3 वर्षों से 100+ लाभार्थियों के साथ किसी भी प्रकार का आश्रय घर, अनाथालय, वृद्धाश्रम अथवा महिलाश्रम का संचालन कर रही हैं, उनको आश्रम निर्माण से संबंधित जमीन और भवन की व्यवस्था सरकार द्वारा प्रदान की जाए ।
  • किसी भी संस्था के सेवा वाहन को 15 किलोमीटर के दायरे में क्षेत्रीय टोल प्लाजाओं पर कर- मुक्त आवागमन के लिए हितग्रही घोषित किया जाए।
  • ग्रामीण विकास, सौंदर्यकरण, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, वृक्षारोपण, पार्कों की देखरेख, पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहर की देखरेख, विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए लाभार्थी पहचान कार्यक्रम, धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार व सौंदर्यीकरण और विभिन्न सरकारी आयोजनों/कार्यक्रमों इत्यादि में विभिन्न सेवाओं के लिए किसी भी प्रकार के टेंडरों में 40% कोटा केवल NGOs के लिए आरक्षित किया जाए।
  • विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली सामाजिक संस्थाओं को/समाज सेवियों को एक पूर्व निर्धारित सहायता राशि/मानदेय/गुजारा भत्ता सरकार द्वारा उनको लाभार्थी के रूप में दिया जाना सुनिश्चित किया जाए।
  • सामाजिक संस्था संचालकों/सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस विभाग एवं अन्य सरकारी दफ्तरों/कार्यालयों/विभागों में सभी संबंधित अधिकारियों द्वारा उचित सम्मान और उनके कार्यों को वरीयता देने संबंधित दिशा निर्देश जारी किए जाएं।
  • समाज सेवा के क्षेत्र में अतिसंवेदनशील बिंदुओं (जैसे Human Traffecking, De- Addiction, Animal Rescue) पर कार्य करने वाले संस्था संचालकों / समाजसेवियों की सुरक्षा तय की जाए। और पुलिस प्रशाशन को इसके लिए विशेष रूप से निर्देशित किया जाए।
  • संस्थाओं द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों, जो कि समाज में एक अच्छा संदेश फैलाते हैं, के आयोजन/गतिविधियों से संबंधित खबरों का प्रकाशन मुख्य धारा के समाचार पत्रों में किया जाना अनिवार्य किया जाए।

चौदह सूत्रीय ज्ञापन

Scroll to Top